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पोस्ट वही जो लफ़ड़े करवाये..डॉ अमर (..खुशदीप)

Posted on
  • Sunday, May 13, 2012
  • by
  • Khushdeep Sehgal
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  • आप सबसे पहले तो माफ़ी चाहता हूं कि अमर वचन का सिलसिला मेरी व्यस्तता के चलते बीच में टूट गया था...डॉक्टर अमर कुमार के हमारे बीच से ​गए करीब नौ महीने हो गए हैं...लेकिन  इन नौ महीनों में मैंने रोज़ाना अपने दिवंगत  पिता को याद  किया तो डॉक्टर  साहब  ​रिफ्लेक्स   एक्शन की​तरह खुद-ब-खुद हमेशा मेरे ज़ेहन में आते रहे... टिप्पणियों  के रूप में उनके अनमोल शब्दों को अपने ब्लाग की मैं सबसे बड़ी धरोहर मानता हूं...

    मैं शुक्रगुज़ार हूं उन ब्लागर साथियों का जिन्होंने इस  ब्लाग के लिए अपनी अपनी पोस्ट पर आई  टिप्पणियां भेजीं...वो सब  टिप्पणियां मैं प्रकाशित  कर चुका हूं...बस  डॉक्टर अनुराग  आर्य और  शिखा वार्ष्णेय  की भेजी दो-दो टिप्णियां प्रकाशित  होने से रह  गई थी...लेकिन  वो न  जाने कैसे मेरे जीमेल  अकाउंट  से डिलीट हो गईं...इसके लिए  मैं डॉक्टर अनुराग  और  शिखा से क्षमाप्रार्थी हूं..दोनों अगर उन्हें फिर भेज  दें, तो मैं बहुत आभारी रहूंगा..​

    मैंने यही सोचा था कि जब मुझे और ब्लागर साथियों से मिली डॉक्टर अमर कुमार की सभी टिप्पणियां प्रकाशित हो जाएंगी, फिर अपनी पोस्ट पर आईं​ डॉक्टर साहब की टिप्पणियों को प्रकाशित करना शुरू करूंगा...वही सिलसिला आज  से शुरू कर रहा हूं...  डॉक्टर साहब की ये टिप्पणी मुझे17 सितंबर 2009 को अपनी लिखी पोस्ट पर  मिली थी...पहले टिप्पणी, बाद में उस  पोस्ट का लिंक  है, जिससे टिप्पणी के संदर्भ  को समझा जा सके...​
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    ब्लागर आक्सफ़ोर्ड के नाम से एक ब्लाग ही न चला दिया जाये ?
    जिसका यह टैगलाइन भी हिट होगा, यह तो पक्का मान लीजिये
    " इत्थों वड्डे फ़ँडे वाले वड्डे फ़ँडाधीश महाराज़ दा अशीश पाओ जी "
    इक पोस्ट नाल टिप्पण दे तिन फ़सलाँ दी गरँटी

    इन जैसे नाम सरीखे स्थायी स्तँभ भी रहे, तो बुरा न लगेगा ।
    खबीस जिनको बनाया हमने मठाधीश
    सुरागिया के खुर्दबीन से

    गिरती टी.आर.पी. को सँभाले रखने के लिये बीच बीच में ऎसी शीर्षकों वाले पोस्ट ठेले जाते रहें तो क्या बात है

    उस पँक्चर साइकिल की याद में
    पोस्ट वही जो लफ़ड़े करवाये
    जो मैंने लिखा नहीं, वह किसी ने पढ़ा नहीं
    खिसके हुये मगज़कर का फ़ालतूफ़ँडिया ’फ़र्ज़ी’ से नोंकझोंक


    TRY NOW..
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    ये रहा मेरी पोस्ट का लिंक...पोस्ट हिट कराने के पांच फंडे


    13 comments:

    अजय कुमार झा said...

    खुशदीप भाई , हमरे पास भी डाक्टर साहब का टिप्पी का बहुत अनमोल खजाना धरा पडा है । रुकिए हम भेजते हैं आपको छांट छांट के

    mukti said...

    खुशदीप भाई, यह बहुत ही अच्छा काम कर रहे हैं आप. मैं पिछले कुछ दिनों से ब्लॉगजगत से दूर हूँ, तो मुझे इस मुहिम के बारे में कुछ नहीं मालूम था. क्या मैं अब से आपके पास अपने ब्लॉग पर आयी डॉ. अमर कुमार जी की टिप्पणियाँ भेज दूँ. आप प्रकाशित करेंगे?

    Khushdeep Sehgal said...

    ​​@अजय भाई, ​
    ​​भेजिए जल्दी भेजिए...​
    ​​
    @​मुक्ति जी,​
    ​ये खज़ाना तो ऐसा है जितना बांटा जाएगा, उतना ही हम सब का लाभ होगा..​
    ​​
    ​मैं कोशिश कर रहा हूं कि इस ब्लाग पर ऐसी व्यवस्था हो सके कि जो चाहे सीधे ही यहां पोस्ट कर सके...​तब तक आप मुझे डाक्टर साहब की टिप्पणियां sehgalkd@gmail.com पर भेज दें, मैं आभारी रहूंगा...​
    ​​
    ​जय हिंद...

    आकाश सिंह said...

    आपकी लेखनी को सलाम | बहुत ही संजीदगी से लिखी हुई पन्तियाँ | धन्यवाद यहाँ भी आयें - www.akashsingh307.blogspot.in

    EK LAFDA IDHAR BHI.......

    रचना said...

    rupesh shrivastav bhi nahin rahey aap sae aagrah haen ki is blog kae maadhyam sae unkae upar bhi baat hoti rahey

    Shah Nawaz said...

    मैं भी रचना जी की बात से सहमत हूँ... केवल रूपेश जी ही नहीं बल्कि, अपने सभी वापिस ना आ पाने वाले ब्लोगर बंधुओं की याद रखी जाने वाली बातों को डॉ. अमर जी को समर्पित इस ब्लॉग पर सहेज कर रखा जा सकता है... फिर जहाँ तक मुझे पता है... आप भी तो यही चाहते हैं खुशदीप भाई....`

    Khushdeep Sehgal said...

    शाहनवाज़,​
    ​इसीलिए कह रहा हूं, इस ब्लाग पर जल्दी से जल्दी ये सुविधा शुरू कर दी जाए कि बिछड़े हुए साथियों को स्मृति सुमन देने के लिए कोई भी ब्लागर सीधे ही पोस्ट डाल सके...जैसे पिछले साल डाक्टर अमर कुमार के साथ ही हिमांशु जी, संध्या जी और अब डाक्टर रूपेश श्रीवास्तव को काल के क्रूर ​हाथों ने हमसे छीन लिया...इन सबकी यादों के लिए भी ये ब्लाग खुला है...यही डा अमर कुमार के व्यक्तित्व और कृतित्व को सच्ची श्रद्धांजलि होगा...​
    ​​
    ​जय हिंद...

    रविकर फैजाबादी said...

    रविकर चर्चा मंच पर, गाफिल भटकत जाय |
    विदुषी किंवा विदुष गण, कोई तो समझाय ||

    सोमवारीय चर्चा मंच / गाफिल का स्थानापन्न

    charchamanch.blogspot.in

    DR. ANWER JAMAL said...

    शीर्षक देखकर जाना जा सकता है कि ‘ब्लॉगिंग‘ के मूल तत्व को जानते थे डाक्टर अमर कुमार।

    रचना said...

    khushdeep
    aap ek post daal kar iski shuruvaat kar dae jaesaa ki aap khud hi keh chukae haen

    jo nahin rahey un par ek aaleskh dae diyaa jaaye

    jolink mujhe milaegae wo mae praeshit kar dungi

    ek nanha blogger bhi nahin rahaa haen link khoj kar daeti hun

    Sidharth Joshi said...
    This comment has been removed by the author.
    Sidharth Joshi said...

    एक टिप्‍पणी मेरे पास भी है...
    http://allastrology.blogspot.in/2009/03/blog-post_30.html

    सुशील कुमार जोशी said...

    श्रद्धांजलि ।

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