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चिरकुटई का कोटा...डॉ अमर (साभार डॉ अनुराग आर्य)

Posted on
  • Friday, September 9, 2011
  • by
  • Khushdeep Sehgal
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  • डॉ अनुराग ने पिछले साल पंद्रह अगस्त को पोस्ट लिखी थी- चिरकुटई की डेमोक्रेसी...उस पोस्ट पर आई डॉ अमर कुमार की टिप्पणी और लिंक भेजने के लिए डॉ अनुराग का बहुत बहुत शुक्रिया...इन टिप्पणियों की तलाश का प्लसपाइंट ये भी है कि जो कुछ बेहतरीन लिखा पढ़ने से छूट गया था, वो भी अब पढ़ने को मिल रहा है...




    http://anuragarya.blogspot.com/2010/08/blog-post.html

     
    चिरकुट चिंतन से उपजी एक बेहतरीन कमेन्ट्री..
    दरअसल इस मुल्क को भगवान ने ख़ास तौर पर चिरकुटई का कोटा ऍलाट किया है,
    और.. सच तो यह है कि इन चिरकुटों ने इसके लिये अपने हिसाब से ऑर्डर पर भगवान तैयार कराया है ।
    ~~~अ कस्टॅमाइज़्ड गॉड फ़ुलफिलिंग दॅयर सेक्सी डिज़ॉयर्स, ===वॉऔ, व्हाट अ सेक्सी गड़ेंशा इन शॉकिंग रेड फ़ॅर कार-डैशबोर्ड.. गड़ेंशा नेंईं बेबी, इट स्पेल्ड गनेशा ! व्हाटेवर इट इज़... आय एम डाइंग टू हैव दिस पीस ऑफ़ गनेशा डियर हॅनी ! यह पढ़ कर हँसों मत चिरकुट, ऍप्लाज़ इट विद अ सेक्सी स्माइल !
    अगर आप चीजों के सेक्सी होने में विश्वास नहीं करते, और ज़मीन से जुड़ा यथार्थ ढूँढ़ते फिरते हैं तो आप निरे दरज़े के चुगद और हारे हुये सटोरिये के पिद्दी लगते हैं । हद है यार, मुल्क व क़ौम के रोटी की चिन्ता में लोग दुबले होते हुये बिल्डिंगें खड़ी कर रहे हैं, और दो अदद ए.सी. रखने के अपराधबोध को ढोते हुये आप अपने लिये रोटी तलाश रहे हैं ?
    रखिये अपने बगल में साढ़े छः सौ रुपिये के राजमोहन गाँधी को...
    हद है, डॉक्टर अनुराग, जाने आप किस सदी के हैं, जो लोगों के सेक्सी सोच पर अपना भेज़ा ख़राब करते हुये तबाह हुये जा रहे हैं ? मौज़ूदा समय के ट्रेन्डी शब्दावली में कहूँ, तो... ( not to be moderated.. it kills the soul of the expression ! ) क्या पोस्ट लिखी है, पार्टनर । आपने तो फाड़ कर रख दी..


    वैसे मेरा एक चिरकुट आग्रह भी है, ई-मेल सब्सक्रिप्शन विकल्प लगा लें, मुझे यह पोस्ट आज पढ़ने को मिली है !..

    ५ सितम्बर २०१० १२:३७ अपराह्न
    डा० अमर कुमार ने कहा…

    1 comments:

    DR. ANWER JAMAL said...

    अच्छी पोस्ट .

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