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स्टेनली का डब्बा, बच्चा, सहारा...डॉ अमर (साभार रश्मि रवीजा)

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  • Tuesday, September 6, 2011
  • by
  • Khushdeep Sehgal
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  • बाल श्रम...हमारे देश में इसे रोकने के लिए क़ानून भी है...लेकिन क्या गांव, क्या शहर, क्या मेट्रो...हर जगह बच्चे मज़दूरी करते नज़र आ जाएंगे...आप क़ानून तो बना सकते हैं लेकिन व्यावहारिक तौर पर इसे रोक नहीं सकते...रश्मि रवीजा ने अपनी पोस्ट स्टेनली का डब्बा पर आई डॉ अमर कुमार की एक टिप्पणी भेजी है...ये अकेली टिप्पणी ही बताने के लिए काफ़ी है कि डॉ अमर कुमार किस माटी के बने थे...वो किरदार जिनके आगे सभी बौने हो जाते हैं...मेरी विनती है कि इस टिप्पणी के साथ रश्मि बहना की पोस्ट और उसी पोस्ट में दिए हुए लिंक के ज़रिए डॉ अमर कुमार की रचना को भी ज़रूर पढ़ें....

    डा० अमर कुमार said...
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    तो... मेरी पोस्ट किसी को प्रेरणा भी दे सकती हैं, अहाहा हा... किंम आश्चर्यम !
    दरसल मेरा पोस्ट भी स्टेनली को देखने के बाद स्वयँ लिपिबद्ध होने को मचल उठा ।
    मुझे स्टेनली का उत्तरार्ध .. उसका मैला-कुचैला टिफ़िन का डिब्बा.. वर्मा सर के सम्मुख एक एक कर व्यँजन परोसना, उनका शर्मिन्दगी से फूट पड़ना फ़िल्म को एक कृत्रिम ऑरा की ओर धकेल देता है... फिर भी बालश्रम का मुद्दा ज़्वलँत तो है ही । 1982 से 1991 तक मैंनें कई किशोरों ( लगभग 14 बच्चों ) को नाई की दुकान, परचून वेंडर शॉप , होटलों से उठाया... उनमें से 10 को ग्रेज़ुऎट स्तर तक ले गया, 2 अध्यापक हैं, 6 सरकारी और गैर-सरकारी सँस्थानों में कार्यरत हैं, शेष अपना स्वतँत्र व्यवसाय कर रहे हैं ।
    यह उदाहरण मैंने अपने मुँह मियाँ मिट्ठू बनने को नहीं दिया है, बल्कि यह दर्शाता है कि व्यक्तिगत स्तर पर भी इनका उद्धार किया जा सकता है... इनके मध्य स्वतः ही बुक-क्लॅब बन जाता है.. थोड़ी भागदौड़ और प्रयास से अधिकाँश को फ़्रीशिप भी मिल जाती है ।
    अब आप इस उदाहरण से प्रेरणा लेकर किसी दो बच्चे को सहारा दे दें, इससे नेक और सँतोष देने वाला कार्य अन्य कोई नहीं ।


    June 12, 2011 9:05 AM

    2 comments:

    DR. ANWER JAMAL said...

    Nice post .
    ये राजनीति की देन हैं। सही जानकारी के लिए देखिए
    यह वेबसाइट
    ‘इस्लामिक पीस मिशन‘ Islamic Peace Mission
    शांति के लिए समर्पित एक वेबसाइट

    मीनाक्षी said...

    "मुझे पढ़ लो, हज़ार कोटेशन पर भारी पढूँगा" डॉ अमर की लिखी यह कोटेशन सौ फीसदी सच साबित हो रही है...यकीनन उनकी टिप्पणियों को आप कोटेशनज़ की तरह ही सहेज रहे हैं...आभार

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