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जग हँसा क्यूँ राम मिले न माया है..डॉ अमर( साभार राजीव तनेजा)

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  • Monday, September 5, 2011
  • by
  • Khushdeep Sehgal
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  • आज डॉक्टर अमर कुमार की तेरहवीं है...डॉक्टर साहब को विनम्र श्रद्धांजलि...
    टिप्पणियों की कड़ी में आज राजीव तनेजा भाई को मिले डॉक्टर साहब के अनमोल वचन....


    डा० अमर कुमार said...
    .अँदाज़े बयाँ मस्त है, बकिया कॅन्ट्रोवर्सी पर कुछ न कहूँगा ।
    खसम किया - बुरा किया, करके छोड़ दिया - उससे ज़्यादा बुरा किया, छोड़ कर दुबारा पकड़ लिया - हाय रे तूने ये क्या किया ...... ऎसी नौबत ही क्यों आये, ब्लॉगिंग क्यों छोड़े भला !

    11:07 PM, May 11, 2011

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    डा० अमर कुमार said...
    सरफ़रोशी को सलवार पहनी..
    फिर पतली गली उन्होंनें पकड़ी
    अपनी ही चालों ने यूँ दौड़ाया है
    जग हँसा क्यूँ राम मिले न माया है

    11:11 AM, June 13, 2011

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    डा० अमर कुमार said...
    यो कहाणी पढण आले कू टिन्शन देण वास्ते लिख्या के ?
    लिखदा रह चल लिखदा रह, आग्यै क्या लिक्खे सै ?

    1:15 AM, May 27, 2011
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    डा० अमर कुमार said...
    आज हँसते रहो पर
    राजीव के मन की व्यथा झलक रही है ।
    कोई है, यहाँ ब्लागर पर, इस लड़के की मदद करने को ?
    2:42 AM, July 21, 2008

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