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हट हट कर मरना, सट सट कर मरना...डॉ अमर (साभार डॉ अनुराग आर्य)

Posted on
  • Saturday, August 27, 2011
  • by
  • Khushdeep Sehgal
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  • डॉ अनुराग आर्य पेशे से चिकित्सक है...लेकिन उनके अंदर अद्भुत शब्दशिल्पी भी छुपा है...यही वजह है कि उनका लेखन अलग ही बोलता है...डॉ अनुराग से डॉ अमर कुमार का विशेष स्नेह रहा है...डॉ अनुराग के लिखे को डॉ अमर कितना पसंद करते थे, ये उन्हें मिली टिप्पणियों को ही पढ़ने से स्पष्ट हो जाता है...अगली पोस्टों में डॉ अनुराग को मिली डॉ अमर की टिप्पणियों को आप पढ़ेंगे तो कोशिश करुंगा कि उस पोस्ट विशेष का लिंक भी दूं...डॉ अमर कुमार की इस टिप्पणी में पढ़िए स्मोकिंग और लविंग के साम्य का अनोखा फ़लसफ़ा...




    अनुमोदन हेतु प्रेषित :
    अ ब स क का प्रतीकीकरण जँच गया
    मैं भी सोचता हूँ तुम्हारे अफ़सानों में सिगरेट क्यों छायी रहती है ।
    क्विट स्मोकिंग और क्विट लॅविंग में बड़ा साम्य है,
    यह जानते हुये कि दोनों कहीं न कहीं जिस्म को घायल कर रही हैं... कोई छोड़ नहीं पाता ।
    चीज ही ऎसी है ज़ालिम कि अगर कुछ हट हट कर मरते हैं, तो कुछ सट सट कर भी मरते हैं ।

    अनुमोदित करने के लिये धन्यवाद !

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    डॉ अनुराग का मैं विशेष तौर पर आभारी हूं...उन्होंने अपनी पोस्ट पर आए डॉ अमर कुमार की टिप्पणियों के अनमोल खज़ाने को इस ब्लॉग के लिए भेजा है...खुशदीप

    2 comments:

    DR. ANWER JAMAL said...

    Nice post .

    डॉ अमर कुमार एक ज्ञानी आदमी थे।
    उनकी टिप्पणी उनके ज्ञान का प्रमाण है।
    जिसे आप देख सकते हैं इस लिंक पर
    सारी वसुधा एक परिवार है

    दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

    सुंदर!

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