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पर तुम उन अच्छाईयों में ज़िन्दा रहोगे...डॉ अमर (साभार सतीश सक्सेना)


सतीश सक्सेना भाई जी से डॉ अमर कुमार का खास लगाव था...ठीक एक दोस्त की तरह...दोस्त की तरह ही कभी कभी टांग खिंचाई भी...लेकिन ये सतीश भाई ही थे जिनसे डॉक्टर साहब ने पहली बार ज़िक्र किया था कि उनके मुंह के कैंसर की सर्जरी सात घंटे तक चली...ऐसी हालत में भी ब्लॉगवुड के लिए उनका प्यार इस टिप्पणी से जाहिर होता है-

" Had jaw cancer, got an 7 hour marathon commando surgery last Monday . Do not worry I am ok and will continue to haunt the blogwud for several years. unable to speak clearly for next 3 months. chalega ....sab chalega bhai !
sab manjoor ! "

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नीचे वाली टिप्पणी को गौर से पढ़िए...इसमें डॉक्टर साहब का यही संदेश है कि तमाम विपरीत परिस्थितियों से गुज़रते हुए भी जिंदादिली नहीं छोड़नी चाहिए-

Dr Amar Kumar:
8 april 2011 at " mere geet"
मेरे दद्दू, मेरे भ्राता... तुमने मुझे ही लपक लिया । धन्य हो आप... और मेरा धन्यवाद भी आपको । इतनी टिप्पणियाँ तो मूल पोस्ट पर भी नहीं है, यहाँ अब तक उपस्थित सभी शुभाकाँक्षियों को मेरा विनम्र अभिवादन !
सँदेश साफ़ है.. जो अपरिहार्य है, उसे हँस कर स्वीकार करिये । बिसूरने से.. रोने चिल्लाने से आपकी सज़ा की मियाद कम न होगी.. उल्टे दर्द और बढ़ ही जायेगा । जब तक जीवित हो, बुरे से अच्छों के पक्ष में लड़ते रहो.. कल कोई तुम्हें याद भले ही न करे... पर तुम उन अच्छाईयों में ज़िन्दा रहोगे ।
गीतकार के शब्दों में... नाम गुम जायेगा... चेहरा यह बदल जायेगा.. मेरी आवाज़ ही पहचान है.. ग़र याद रहे ।
http://satish-saxena.blogspot.com/2011/04/blog-post_08.html

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एग्रीगेटर ब्लॉगवाणी के बंद होने का डॉक्टर साहब को भी बड़ा दुख था...इसका उन्होंने सतीश भाई से जब ज़िक्र किया था तो वो कैंसर वार्ड में ही थे....


Wow Satish Bhaiya,
I read your mail today only, after recovering a lot from a crisis.
I was the first man to offer my proposal in the likewise manner to The Gupt Duo, I could understand their grief of parting with their dream project.
I took interest and suggested some modifications in Blogprahari,he kindly honored them too... but He was taken for ride, rather lured for a ride by few stalwarts and he Gone Gudum, the fellow kanishk Kashyap !

I own my personal website AMARHINDI and some technical resources too, So I planned an agregater in detail with Kush... BUT THE IRONY OF THE SCENARIO IS A BITTER TRUTH that we need a segregator not an agregater...
who can categorically sort out the region, topic, and GUTwise ;)Posts.

Sorry for such an inexpressive english.. but chalega, I am already being moderated in this Cancer Ward !

2 comments:

सञ्जय झा said...

veerji tussi bara nek kaam kitaa.......
'guruwar' ke yaad me ee blog ditta.....

pranam.

Satish Saxena said...

उनकी यादें रहेंगी ...

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