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डॉ अमर कुमार को समर्पित एक ब्लॉग...

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  • Friday, August 26, 2011
  • by
  • Khushdeep Sehgal
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  • प्रिय ब्लॉग मित्रों,

    डॉ अमर कुमार नहीं रहे...ये हक़ीक़त है...लेकिन दिल इसे मानने को तैयार नहीं...मौत को भी ज़िंदादिली सिखा देने वाले शख्स को आखिर मौत कैसे हरा सकती है...कैसे ले जा सकती है ब्लॉग जगत के सरपरस्त को हम सबसे दूर...दर्द को भी कहकहे लगाना सिखा देने वाले डॉ अमर कुमार का शरीर बेशक दुनिया से विदा हो गया लेकिन जब तक ये ब्लॉगिंग रहेगी उनकी रूह, उनकी खुशबू हमेशा इसमें रची-बसी रहेगी...टिप्पणियों में छोड़ी गई उनकी अमर आशीषों के रूप में...

    कहते हैं इंटरनेट पर छोड़ा गया एक एक शब्द अमर हो जाता है...और उनका तो नाम ही अमर था...अमर मरे नहीं, अमर कभी मरते नहीं....डॉक्टर साहब अब ऊपर वाले की दुनिया को ब्लॉगिंग सिखाते हुए हम सबकी पोस्टों को भी देखते रहेंगे...डॉ अमर कुमार को समर्पित ये ब्लॉग शाहनवाज़ के साथ मिलकर मेरी एक छोटी सी कोशिश है, उनके छोड़े गए अनमोल वचनों को एक जगह एकत्र करने की...ये महत्ती कार्य आप सबके सहयोग के बिना संभव नहीं हो सकता...मैं अब जुट गया हूं, अपनी पोस्टों पर आईं उनकी एक एक टिप्पणी को सहेजने में...

    आपको जब भी थोड़ा वक्त मिले, डॉ अमर कुमार की याद को अमर करने के लिए अपनी पोस्टों पर आईं उनकी टिप्पणियों को सहेजिए...यकीन मानिए ये सीप के मोती अब भी हमें सीख देते रहने के साथ नए ब्लॉगरों के लिए भी प्रकाश-पुंज का कार्य करेंगी...ये टिप्पणियां आप या पर भेज सकते हैं...बस एक विनती और हर टिप्पणी के साथ और तारीख और उनके पब्लिश होने का टाइम भी होता है...अगर उसे भी भेजेंगे तो ये भी पता चलेगा कि किस वक्त डॉक्टर साहब के ज़ेहन में वो विचार आया था...इस काम को अपनी सुविधा के अनुसार करिए...एक टिप्पणी मिले तो एक टिप्पणी भेज दीजिए...वो सब आपके नाम के साथ पोस्ट के रूप में इस ब्लॉग पर चमक बिखेरेंगी...इसके अलावा डॉक्टर साहब से जुड़े आपके संस्मरण हैं तो वो भी भेजिए...

    कोशिश यही है कि जब तक ब्लॉगिंग चले, डॉक्टर साहब हमसे कभी जुदा न हों...कितना भी दर्द, दुख डॉक्टर साहब के शरीर ने झेला, लेकिन दूसरों को हंसाना उन्होंने कभी नहीं छोड़ा...डॉ साहब के इसी जज़्बे को अपने जीवन में उतारना ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि होगी...मैं खुशनसीब हूं कि एसएमएस पर उनसे जोक्स पढ़ने-पढ़ाने का सिलसिला चलता रहता था...लगता है अब भी यही आवाज़ कानों में आएगी...खुशदीपे या खुशदीप पुत्तर....

    अंत में इसी प्रार्थना के साथ...डॉ अमर कुमार को परमपिता अपने चरण-कमलों में स्थान दे और श्रद्धेय माताजी, रूबी भाभी जी, बेटे डॉ शांतनु अमर के साथ सभी परिवारजनों को इस असीम दुख को सहने की शक्ति प्रदान करे...

    आपकी भेजी जाने वाली डॉ साहब की टिप्पणियों के इंतज़ार में...

    आपके

    खुशदीप और शाहनवाज़

    5 comments:

    सतीश सक्सेना said...


    आपके और शाहनवाज भाई के द्वारा किये गए इस अनूठे कार्य पर मैं आपको बधाई देता हूँ खुशदीप भाई !

    कहते हैं, जाने वाले को कोई याद नहीं रखता मगर आप अपवाद निकले ...

    कथनी और करनी में साम्यता बहुत कम देखने को मिलती है !

    मैं शीघ्र इस पुन्य काम में योगदान देने का प्रयत्न करूंगा !

    आप दोनों को शुभकामनायें !

    सतीश सक्सेना said...

    डॉ अमर कुमार की एक टिप्पणी जो उन्होंने कैंसर वार्ड से लिखी है, प्रकाशित कर रहा हूँ !

    Wow Satish Bhaiya,
    I read your mail today only, after recovering a lot from a crisis.
    I was the first man to offer my proposal in the likewise manner to The Gupt Duo, I could understand their grief of parting with their dream project.
    I took interest and suggested some modifications in Blogprahari,he kindly honored them too... but He was taken for ride, rather lured for a ride by few stalwarts and he Gone Gudum, the fellow kanishk Kashyap !

    I own my personal website AMARHINDI and some technical resources too, So I planned an agregater in detail with Kush... BUT THE IRONY OF THE SCENARIO IS A BITTER TRUTH that we need a segregator not an agregater...
    who can categorically sort out the region, topic, and GUTwise ;)Posts.

    Sorry for such an inexpressive english.. but chalega, I am already being moderated in this Cancer Ward !

    सतीश सक्सेना said...

    उनसे मिले एक मैसेज के अनुसार जबड़े के कैंसर का आपरेशन ६ घंटे तक चला है, इससे इस बीमारी की भयावहता पता चलती है मगर उनकी जीवन्तता हम सबके लिए अनुकरणीय है...आप उनकी मस्ती की झलक इस मोबाइल मेसेज में देख सकते हैं ....

    " Had jaw cancer, got an 7 hour marathon commando surgery last Monday . Do not worry I am ok and will continue to haunt the blogwud for several years. unable to speak clearly for next 3 months. chalega ....sab chalega bhai !
    sab manjoor ! "

    सतीश सक्सेना said...

    Dr Amar Kumar:
    8 april 2011 at " mere geet"

    मेरे दद्दू, मेरे भ्राता... तुमने मुझे ही लपक लिया । धन्य हो आप... और मेरा धन्यवाद भी आपको । इतनी टिप्पणियाँ तो मूल पोस्ट पर भी नहीं है, यहाँ अब तक उपस्थित सभी शुभाकाँक्षियों को मेरा विनम्र अभिवादन !

    सँदेश साफ़ है.. जो अपरिहार्य है, उसे हँस कर स्वीकार करिये । बिसूरने से.. रोने चिल्लाने से आपकी सज़ा की मियाद कम न होगी.. उल्टे दर्द और बढ़ ही जायेगा । जब तक जीवित हो, बुरे से अच्छों के पक्ष में लड़ते रहो.. कल कोई तुम्हें याद भले ही न करे... पर तुम उन अच्छाईयों में ज़िन्दा रहोगे ।
    गीतकार के शब्दों में... नाम गुम जायेगा... चेहरा यह बदल जायेगा.. मेरी आवाज़ ही पहचान है.. ग़र याद रहे ।

    सतीश सक्सेना said...

    "जब तक जीवित हो, बुरे से अच्छों के पक्ष में लड़ते रहो.. कल कोई तुम्हें याद भले ही न करे... पर तुम उन अच्छाईयों में ज़िन्दा रहोगे । "
    http://satish-saxena.blogspot.com/2011/04/blog-post_08.html

    उनके यह शब्द , लोकरीति बताते हुए कर्मयोग की बेहतरीन सलाह देता है जब तक वे जीवित रहे इसी रह पर चलते रहे ...
    ब्लॉग जगत में शायद ही किसी लेखक को ध्यान से समझा जाता हो अफ़सोस तब होता है जिन्हें हम श्रद्धावश देखते हैं वे भी कुछ समय में आम व्यक्तिओं जैसा वर्ताव करते नज़र आते हैं ...यही त्रासदी है ब्लॉग जगत की... कोई किसी को भी अच्छा नहीं मानता ....
    डॉ साहब की तीखी टिप्पणियां उनकी न्यायप्रिय शख्शियत का अहसास दिलाती थीं जिन ब्लोग्स को वे पढ़ते थे हर एक पर उनके यह निशान मौजूद हैं !

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